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आलोक कुमार
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फ़ारसी और फ़ारसी

फ़ारसी की खोज,
और

फ़ारसी की खोज -

दोनो में फ़र्क है।

दरअसल, इस शब्द को दो तरह से लिखा जा सकता है - यदि आप इस कुञ्जीपटल को देखें, तो एक तरीका है -
फ़, आ की मात्रा, र, स, ई की मात्रा।
दूसरा तरीका है -
फ, नुक्ता, आ की मात्रा, र, स, ई की मात्रा।

लेकिन अन्ततः शब्द वही है।

इसको आप वर्तनी का फ़र्क भी नहीं कह सकते हैं। वर्तनी एक दम वही है। color बनाम colour, गई बनाम गयी, इसलिए बनाम इसलिये वाला हिसाब किताब नहीं है।

ये तो उसी शब्द को हूबहू लिखने के दो अलग अलग तरीके हो गए - किसी भी तन्त्रांश को वैयाकरणीय तुलना में दोनो को एकदम एक समान मानना चाहिए। लेकिन गूगल इनकी बाइट दर बाइट तुलना करता है और मार खा जाता है।

ज़ाहिर है जो इंसान फ़ारसी खोज रहा है, उसे इस बात से मतलब नहीं है कि यह शब्द किन कुञ्जियों को मिला कर लिखा गया है। ये एक बहुत गम्भीर समस्या है जो कि आगे चल कर पङ्गे खड़े करेगी।

और भाषाओं में इसका निदान कैसे होता है? पता नहीं और लिपियों में ऐसी स्थिति आती है या नहीं।
बहरहाल गूगल को इस बारे में लिखा है, देखते हैं क्या होता है। आप भी लिखिए - news:google.public.support.general पर लिखा है।
Tags: खोज, गूगल, देवनागरी, समस्या
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