गूगल हिन्दी में
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Below are the 20 most recent journal entries recorded in
गूगल हिन्दी में's LiveJournal:
| Tuesday, November 27th, 2007 | 9:01 pm [alok]
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गूगल प्रदान करेगा ऑन्लाइन भंडारण वॉल स्ट्रीट जर्नल(अंग्रेज़ी) बता रहा है कि गूगल जल्द ही ऑन्लाइन भण्डारण की सुविधा प्रदान करने जा रहा है। मुफ़्त और शुल्कदत्त दोनो तरह की सेवाएँ होंगी, और इस सामग्री को विंडोज़ प्रयोक्ता आसानी से खोज व अन्य माध्यमों के जरिए प्राप्त कर सकेंगे। यह नहीं बताया गया है कि भंडारण कितना होगा पर जीमेल की पाँच गीगाबाइट भंडारण को मद्देनज़र रखते हुए अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इससे तो अधिक ही होगा। इसके अलावा पहले ही कई ऑन्लाइन भंडारण सुविधाएँ मौजूद हैं लेकिन इस सुविधा में गोपनीयता, सुरक्षा और सुहूलियत अहम हैं। | | Sunday, September 2nd, 2007 | 9:20 am [alok]
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गूगल का ऑर्कुट अब हिंदी में संजीत त्रिपाठी बता रहे हैं कि अब गूगल का स्थल ऑर्कुट अब हिंदी में भी उपलब्ध है। हिंदी मे स्थल देखने के लिए सत्रारंभ करने के बाद, सेटिंग्स में जा कर प्रदर्शन भाषा के अंतर्गत हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली या तेलुगु चुने जा सकते हैं। ज़ाहिर है कि ऑर्कुट को हिंदी के जितने अधिक प्रयोक्ता मिलेंगे उतना ही उसका सुधार होगा। अभी भी कहीं कहीं हिंदी उद्धरण में अंग्रेज़ी दिख रही है। ये रही आधिकारिक घोषणा, इसमें उन्होंने वर्तनी ओर्कुट रखी है, ऑर्कुट नहीं, शुक्र है orkut नहीं रखी। ओर्कुट वालों ने भारतीय भाषाओं के अनुवादों के लिए एक आधिकारिक समुदाय बनाया है, अंग्रेज़ी भाषा में, और यह है ओर्कुट हिंदी में - अनाधिकारिक समुदाय जो हिंदी में है। तो अभी ही अपने जमाव को बदल के हिंदी में ओर्कुट देखें। | | Thursday, August 23rd, 2007 | 11:42 am [alok]
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| | Tuesday, August 21st, 2007 | 7:42 am [alok]
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गूगल इलाकाई - अब भारत में
गूगल वालों ने यह काम हिंदुस्तान में भी शुरू कर दिया है। यानी, इलाकाई खोज, गूगल लोकल, और उसमें यदि किसी व्यापारी की जानकारी नहीं है, तो गूगल लोकल बिज़नस सेण्टर है - यानी गूगल की इलाकाई मंडी, पर यहाँ किसी माल का नहीं, दुकानों की जानकारी का आदान प्रदान होता है, और अंततः इनकी खोज होगी गूगल भारत - इलाकाई में। यह सुविधा इसके पहले भारत के लिए नहीं थी - पर अन्य जगहों के लिए थी - गूगल मैप्स के नाम से। तो शायद अगला कदम हिंदुस्तान के लिए नक्शे ही हो? वैसे खोज करने पर दिल्ली के होटल, कलकत्ता में पर्यटन, चेन्नै में खानपान सब मिला, लेकिन रतलाम या मोहाली के नहीं। और यह सब सिर्फ़ अंग्रेज़ी में ही है। अधिक जानकारी वाला पृष्ठ भी फ़िलहाल अंग्रेज़ी में ही है। शायद व्यापारियों द्वारा हिंदी में जानकारी जमा कराने से हिंदी में भी यह सुविधा उपलब्ध होनी शुरू हो जाए। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Monday, August 20th, 2007 | 4:46 pm [alok]
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गूगल लाया हिंदी लिखने की सुविधा श्रीष ने बताया कि इस पंद्रह अगस्त को गूगल ने भारतीयों के लिए एक उपहार भेंट करने की घोषणा की, लेकिन घोषणा अधूरी ही थी, पर गूगल लैब्स के भारतीय स्थल से पता चल ही गया कि उपहार क्या है। वह था लिप्यंतरण की सुविधा। ब्लॉगर सेवा में तो यह पहले ही था, पर बिना सत्रारंभ किए ऐसा करने की सुविधा भी अब होगी। उसी तरह, गूगल के निजीकृत पन्ने पर यह जोड़ने की सुविधा भी होगी - और यह कई ब्राह्मी आधारित लिपियों वाली भाषाओं में उपलब्ध है। पर जैसा कि श्रीष ने बताया, यह सुविधा गूगल मुखपृष्ठ पर प्रदान नहीं की गई है। इसकी वजह दो हो सकती हैं - दोनो ही हैं शायद। एक तो यह कि गूगल इस बात का खास खयाल रखता है कि मुखपृष्ठ पर क्या जाए और क्या न जाए, यह निर्णय मुख्यतः मरीसा मेयर लेती हैं। दूसरा यह शायद लोगों को निजीकृत पन्ने का प्रयोग करने को उकसाने के लिए किया गया हो। जो भी हो, यह स्पष्ट है कि हिंदी पाठकों/लेखकों के मन में गूगल के प्रति जो जगह थी, वह अब और पक्की हो गई है। यह भी उल्लेखनीय है कि गूगल के जिन कर्मचारियों ने यह घोषणा की है, नाम से तो यही प्रतीत होता है कि वे हिंदीभाषी नहीं है। अतः मात्र भावुकता के बजाय यह एक बड़ी सोची समझी रणनीति के अंतर्गत लिया गया एक कदम है। 21 अगस्त को जोड़ा - अंततः ऍम टी रघुनाथ और गोकुल नाथ बाबू मनोहरन ने विस्तृत सूचना दे ही डाली। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Friday, August 10th, 2007 | 4:20 pm [alok]
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जीमेल और पिकासा की निःशुल्क भंडारण सीमा गूगल की डाक सेवा, जीमेल की निःशुल्क भंडारण सीमा है 2.82 गीगाबाइट और पिकासा की है एक गीगाबाइट। यह खबर गूगल के चिट्ठे ने दी है। इसके पहले पिकासा की भंडारण सीमा की तो सूचना थी, लेकिन प्रायः जीमेल के बारे में यही माना जाता था कि कोई सीमा ही नहीं है। अब इस बात का खुलासा हो गया है कि ऐसा नहीं है। इसी प्रकार गूगल डॉक्स - में भी निःशुल्क भंडारण सीमा लागू होगी। यदि आपका अपना गूगल खाता हो, तो अपनी सीमाएँ यहाँ देख सकते हैं। उल्लेखनीय है कि जब जीमेल की सेवा शुरू हुई थी, तो एक शगूफ़ा था पूरा एक गीगाबाइट निःशुल्क भंडारण। उन दिनों याहू और हॉटमेल 4-5 मेगा बाइट, यानी .004 या .005 गीगाबाइट भंडारण ही निःशुल्क देते थे। देखा देखी याहू और हॉटमेल ने भी अपनी सीमा बढ़ाई, लेकिन अगले साल ही दो गीगाबाइट की घोषणा गूगल कर बैठा। अब ऐसा प्रकट हुआ है कि जीमेल में छः गीगाबाइट की सामग्री रख पाने के लिए सालाना बीस डॉलर देने पड़ेंगे - यानी चालीस रुपए वाले - कुल जमा आठ सौ रुपए सालाना। यही दाम पिकासा के भी हैं। जो लोग अब तक पॉप सेवा का इस्तेमाल ही बंद किए बैठे थे, अथवा पॉप का इस्तेमाल करते तो थे, लेकिन जीमेल से कभी डाक मिटाते नहीं थे, उन्हें अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। तो कुल मिला के जीमेल ने निःशुल्क भंडारण के मामले में याहू और हॉटमेल को पीटा तो ज़रूर, लेकिन अंततः थोड़ा और ऊपर आ कर वही नीति अपनाई जो इसके प्रतिद्वन्द्वी भी अपना रहे थे। हाँ, भंडारण के अलावा अन्य खूबियाँ भी जीमेल में हैं, खास तौर पर हिंदी में डाक लिखने और पढ़ने वालों के लिए। अभी भी जीमेल यूनिकोडित हिन्दी में मौजूद एकमात्र डाकसेवा है। शायद इन्हीं अतिरिक्त सेवाओं के चलते गूगल वालों ने सोचा होगी कि शायद प्रयोक्ता पैसे निकालने को तैयार हो जाएँ, पर यह तो समय ही बताएगा कि ऐसा वास्तव में होगा या नहीं। हाँ, एक बात ज़रूर है कि जीमेल की निःशुल्क भंडारण सीमा हर दिन बढ़ती जाती है, अर्थात् यदि आप आज के दिन जीमेल में 2.8 जीबी से अधिक सामग्री रखना चाहें तो आपको पैसे देने पड़ेंगे, लेकिन करीब दो महीने बाद यह थोड़ी अधिक हो जाएगी। अतः जब तक आपकी डाक का आकार बढ़ने की दर जीमेल के निःशुल्क भंडारण की सीमा के बढ़ने के दर से कम है, तब तक आपके लिए यह सेवा निःशुल्क ही रहेगी। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Monday, July 23rd, 2007 | 5:00 pm [jagdishbhatia] |
गूगल अर्थ से आई टैक्स चोरों की शामत गूगल अर्थ के जरिए अपने गली मोहल्ले की तस्वीरें देखते हुए आपने बहुत से लोग देखे होंगे लेकिन इस सैटलाइट सॉफ्टवेयर का असली फायदा उठाया है अर्जेन्टीना के टैक्स डिपार्टमेंट ने क्योंकि इससे बड़ी आसानी से यह पता लगाया जा सकता है कि किस व्यक्ति के पास कितनी बड़ी प्रॉपर्टी है। वह अपनी प्रॉपर्टी के साइज के हिसाब से टैक्स चुका रहा है या नहीं। पूरा समाचार यहां है। | 4:45 am [alok]
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| | Tuesday, July 10th, 2007 | 9:37 am [alok]
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गूगल ने पोस्तिनी को खरीदा, २५ अरब रुपए में
गूगल आए दिन खरीद फ़रोख्त करता ही जा रहा है, तो समझते हैं कि पोस्तिनी है क्या। पोस्तिनी एक कम्पनी है जो बड़े बड़े सङ्गठनों की डाक सेवा व त्वरित सन्देश सेवा को आयोजित करती है। यानी, आप यदि किसी बड़ी कम्पनी के आईटी विभाग में हैं, तो खुद डाक सेवा स्थापित करने के बजाए पोस्तिनी को कह दें, वे सब कुछ सँभाल लेंगे, सुरक्षा से ले के रद्दी डाक के आयोजन तक। इस धन्धे में फ़िलहाल पोस्तिनी का ४९ प्रतिशत हाथ है। लेकिन प्रयोक्ता अन्तरापृष्ठ बहुत बढ़िया नहीं है, और गूगल को इसमें महारत हासिल है। उसी प्रकार गूगल का बड़ी बड़ी कम्पनियों में प्रवेश कम ही है, वे अभी भी उसे शक की नज़र से ही देखती हैं। अतः इससे गूगल व पोस्तिनी दोनो को फ़ायदा होगा यह सोच के ही खरीद का फ़ैसला किया गया होगा। सोचने की बात यह है कि जब हर्शद मेहता ने नरसिंह राव को एक करोड़ रुपए दिए थे, तो वह एक सूटकेस में आ गए थे। यहाँ बात हो रही है उस प्रकार के ढाई हज़ार सूटकेसों की। पर हाँ डॉलर में सूटकेसों की सङ्ख्या ६० ही रह जाएगी। इतना बोझा तो गूगल वाले पोस्तिनी के दफ़्तर तक ढो ही लेंगे। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Tuesday, April 18th, 2006 | 4:19 pm [alok]
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गूगल का वाईफ़ाई - हर सौ फ़िट पर नज़र
गूगल सैन फ़्रांसिस्को में वाई फ़ाई फ़ोकट में प्रदान करने के लिए हिसाब किताब लगा रहा है, यह खबर तो पुरानी है। साथ ही यह जान के आपको अचरज नहीं होगा कि गूगल वाले इतने ट्रांस्मिटर लगाने जा रहे हैं कि उन्हें सौ दोसौ फ़ुट के दायरे में पता होगा कि आप फ़िलहाल शहर में कहाँ हैं। उसी के आधार पर वे विज्ञापन प्रसारित करेंगे। यह ख़बर फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने दी है। तो इसका मतलब ये हुआ कि मिर्चीसेठ अपने पसन्दीदा स्टार्बक्स में बैठे चिट्ठे लिख रहे होंगे, और उनके सामने विज्ञापन आएँगे कि बगल की दुकान में बासमती चावल पर 20% छूट चल रही है। काफ़ी मज़ेदार होगा। पता नहीं आगे शायद गूगल वाले "भ्रमण इतिहास" भी रखें - यानी कि सोलह अप्रैल 2007 को आप कितने बजे कहाँ थे, वहाँ से कहाँ गए आदि। काफ़ी खतरनाक भी लगता है, लेकिन दान की बछिया के दाँत नहीं गिने जाते। यह सेवा बिल्कुल मुफ़्त है। वैसे सैन फ़्रांसिस्को में आप बासमती चावल कहाँ से लेते हैं? मेरी बहन भी वहीं है, जानकारी उसके काम आएगी। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Friday, March 17th, 2006 | 10:15 pm [alok]
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गूगल अर्थ पर चमचमाहट स्केचप त्रिआयामी छवियाँ बनाने के लिए एक बहुत सुगम तन्त्रांश बनाते हैं। वैसे तो इसके पैसे लगते हैं लेकिन कुछ आठ घण्टे के लिए आप इसका मुफ़्त इस्तेमाल कर सकते हैं। स्केचप अन्ततः कुछ .kmf फ़ाइलें बना के देता है, जैसे कि ऑटोकॅड .dwg फ़ाइलें बनाता है, ठीक उसी तरह। इसका इस्तेमाल काफ़ी सरल है और कई सुविधाएँ भी हैं इसमें। पर इसकी चर्चा यहाँ क्यों हो रही है? इसलिए कि स्केचप वालों ने एक गूगल अर्थ प्लगिन बनाया है जिसकी बदौलत गूगल अर्थ पर आप अपनी त्रिआयामी छवियाँ डाल सकते हैं। इस प्रकार, यदि आप किसी खाली मैदान पर कोई नई इमारत बना रहे हैं और देखना चाहते हैं कि वह बनने के बाद कैसी दिखेगी, तो आप उसे गूगल अर्थ के जरिए देख सकते हैं। इसके और भी कई व्यवसायिक व मनोरञ्जक उपयोग हो सकते हैं। इसका एक नमूना है - देखिए, गूगल मॅप्स पर स्वतन्त्रता की देवी कैसी नज़र आती हैं। यही गूगल अर्थ पर भी आपको नज़र आएगा। स्केचप के प्लगिन की बदौलत ये ऐसा दिखेगा - ( अब देखिए ये तस्वीरCollapse )अर्थात स्केचप के जरिए आप अपनी त्रिआयामी रचना को किसी ख़ास अक्षांश व देशान्तर में स्थापित कर के गूगल अर्थ पर दिखा सकते हैं। और ताज़ी ख़बर यह है कि स्केचप को गूगल ने खरीद लिया है। फ़िलहाल स्केचप का तन्त्रांश अङ्ग्रेज़ी, फ़्रांसीसी व जर्मन में उपलब्ध है। हिन्दी में आएगा कि नहीं, पता नहीं। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | 5:21 pm [alok]
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गूगल - किताबों की बिक्री गूगल बुक्स के जरिए आप किताबों से उद्धरित वाक्यांशों की खोज कर सकते हैं, साथ ही कुछ पन्ने पढ़ सकते हैं, पर पूरी तरह नहीं। उसके लिए आपको पुस्तक विक्रेता के पास जाना पड़ेगा। अब गूगल वालों ने एक नया तरीका पेश किया है जिसके जरिए प्रकाशक अपनी किताबों की ऑन्लाइन पाठन सुविधा दाम ले के दे सकते हैं। यानी कि पाठक पैसे दे के पूरी किताब जाल पर पढ़ सकेगा, सिर्फ़ कुछ हिस्से नहीं, लेकिन उसकी प्रतिलिपि नहीं निकाल पाएगा, और नही ही छाप पाएगा। अब यह चेंपना कैसे रोका जाएगा - यह तो पता नहीं, पर गूगल दावा तो कर रहा है कि यह सम्भव है। शायद इसी के जुगाड़ में गूगल वाले लगे हुए हैं, इसलिए यह सुविधा जल्द आने वाले शगूफ़ों की फ़ेरहिस्त में है। हिन्दी की किताबों को भी पढ़ने व पढ़ने का अधिकार बेचने की सुविधा दी जाएगी। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Friday, March 10th, 2006 | 10:54 am [alok]
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गूगल ने राइट्ली को खरीदा
गूगल ने राइट्ली - जाल आधारित शब्द संसाधक - को खरीद लिया है। खरीद के बारे में और जानकारी।राइट्ली है क्या? यह है जाल आधारित शब्द संसाधक - यानी कि आपको अपनी मशीन पर वर्ड, ओपन ऑफ़िस राइटर, नोटपैड, गेडिट, किसी की ज़रूरत नहीं है - सीधे राइट्ली पर जाइए और काम निपटाइए। इतना ही नहीं, राइट्ली के जरिए आप सीधे चिट्ठे में प्रकाशन कर सकते हैं। तो गूगल ने राइट्ली को क्यों खरीदा? सम्भवतः इसलिए, कि - अब आपको कुछ भी लिखना हो तो राइट्ली पर जाइए और लिखिए। सारे दस्तावेज़ भी आपको वहीं मिलेंगे। शायद ब्लॉग्स्पॉट से भी इसकी शादी करा दी जाए। वैसे राइट्ली को सहजता का जीता जागता नमूना माना जाता है - हज़ारों घण्टे लोगों के साथ माथापच्ची करने के बाद उन्होंने अपनी संरचना की है। हाँ, फ़िलहाल राइट्ली के लिए पञ्जीकरण बन्द है, पर आप अपना डाक पता दे सकते हैं - यह तो सही चाल थी, क्योंकि जब भी गूगल ऐसा कुछ काम करता है तो लोग धड़ाधड़ बिग बाज़ार की सेल की तरह पहुँच जाते हैं - जैसे कि अर्चिन के मामले में हुआ था। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Thursday, March 9th, 2006 | 12:48 pm [alok]
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गूगल की पोटली
गूगल वालों ने एक पोटली बनाई है - गूगल पैक पर। इसमें विण्डोज़ ऍक्स पी पर जलने वाले कुछ तन्त्रांश है - फ़ोकट वाले - जो अब तक अलग अलग गूगल से या अन्यत्र मिलते आ रहे थे। इस पोटली को एक बार में उतारने से सभी पिटारे संस्थापित हो जाएँगे, साथ ही, नए बदलावों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। क्या क्या है इसमें गूगल अर्थ, पिकासा, गूगल डेस्कटॉप, ब्राउज़रों की उपकरणपट्टियाँ, स्क्रीन सेवर, ऍण्टी स्पायवेयर और साथ ही एक ऍण्टी वायरस तथा अडोब पाठक भी। इसके अलावा, गूगल टॉक, गूगल वीडियो प्लेयर, रियल प्लेयर, गैलरी प्लेयर, और ट्रिलियन मैसेंजर भी। आप चाहें तो उतारने के पहले निर्णीत कर सकते हैं कि आपको क्या चाहिए और क्या नहीं। उल्लेखनीय है कि इसमें विण्डोज़ ऍक्स पी बनाने वाली कम्पनी का एक भी उत्पाद नहीं है। सम्भवतः इन उपकरणों को प्रोत्साहन देने के लिए गूगल ने कमीशनबाज़ी आदि का सहारा भी लिया होगा। इनमें से काफ़ी चीज़ों के बारे में तो पहले कभी सुना नहीं था - जैसे कि ट्रिलियन और गूगल वीडियो प्लेयर - आपने आजमाया हो तो बताएँ। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Wednesday, March 8th, 2006 | 3:44 pm [alok]
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जीड्राइव की अफ़वाहें
ख़बर गर्म है कि गूगल वाले लोगों की सारी की सारी जानकारी अपनी मशीनों पर और अपनी डिस्कों पर रखने का मास्टर प्लान बना रही है। गूगल का अन्ततः लक्ष्य यह है कि आपके कम्प्यूटर में हार्ड डिस्क नाम की कोई चीज़ ही न रहे - और यदि रहे भी तो आपको एहसास ही न हो कि ऐसा भी कुछ होता है। आपकी डाक, पते, फ़ाइलें, सब कुछ - गूगल के पास रहेगा - उसीमें गूगल से खोज कर कर के आप अपनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। गूगल का इरादा यह है कि इस प्रकार आपकी जानकारी को और तेज़ी से खोजा जा सकेगा। और साथ ही, कहीं भी जाएँ, बिना अपनी मशीन लिए, फिर भी आपकी जानकारी आपके पास ही है। पर कुछ अड़चनें हैं, जैसे कि इतनी सामग्री जाल पर आवाजाही करेगी तो इसकी गति क्या होगी। शायद इसीलिए गूगल फ़ाइबर ऑप्टिक खरीदने को उतारू है। है न विश्वविजयी अश्वमेध यज्ञ की शुरुआत? बीबीसी का कहना है कि गूगल ने इसके बारे में और कुछ कहने से मना कर दिया, और सीनेट के अनुसार ये ख़बर ग़लती से लीक हो गई। अब हमें तो पता है कि गूगल ऐसी ग़लतियाँ अक्सर जानबूझ कर करता रहता है। देखते हैं इस बार 1 अप्रैल को गूगल क्या गुल खिलाता है। क्या आप गूगल के बारे में कुछ बताना चाहते हैं? | | Tuesday, March 7th, 2006 | 2:21 pm [alok]
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| | Monday, March 6th, 2006 | 10:15 am [alok]
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| | Tuesday, November 29th, 2005 | 7:55 am [alok]
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फ़ारसी और फ़ारसी फ़ारसी की खोज, और फ़ारसी की खोज - दोनो में फ़र्क है। दरअसल, इस शब्द को दो तरह से लिखा जा सकता है - यदि आप इस कुञ्जीपटल को देखें, तो एक तरीका है - फ़, आ की मात्रा, र, स, ई की मात्रा। दूसरा तरीका है - फ, नुक्ता, आ की मात्रा, र, स, ई की मात्रा। लेकिन अन्ततः शब्द वही है। इसको आप वर्तनी का फ़र्क भी नहीं कह सकते हैं। वर्तनी एक दम वही है। color बनाम colour, गई बनाम गयी, इसलिए बनाम इसलिये वाला हिसाब किताब नहीं है। ये तो उसी शब्द को हूबहू लिखने के दो अलग अलग तरीके हो गए - किसी भी तन्त्रांश को वैयाकरणीय तुलना में दोनो को एकदम एक समान मानना चाहिए। लेकिन गूगल इनकी बाइट दर बाइट तुलना करता है और मार खा जाता है। ज़ाहिर है जो इंसान फ़ारसी खोज रहा है, उसे इस बात से मतलब नहीं है कि यह शब्द किन कुञ्जियों को मिला कर लिखा गया है। ये एक बहुत गम्भीर समस्या है जो कि आगे चल कर पङ्गे खड़े करेगी। और भाषाओं में इसका निदान कैसे होता है? पता नहीं और लिपियों में ऐसी स्थिति आती है या नहीं। बहरहाल गूगल को इस बारे में लिखा है, देखते हैं क्या होता है। आप भी लिखिए - news:google.public.support.general पर लिखा है। | | Monday, November 28th, 2005 | 1:23 pm [alok]
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हिन्दी वाले गूगल की कड़ी कैसे दें
आमतौर पर जब आप गूगल के बारे में लिखते हुए उसकी कड़ी प्रदान करते हैं तो <a href=" http://google.com">गूगल</a> लिखते हैं। ये कड़ी आपको ले जाएगी गूगल के पन्ने पर, लेकिन सम्भवतः अङ्ग्रेज़ी के पन्ने पर ले जाए। इससे बचने के लिए आप लिख सकते हैं, <a href=" http://google.com/hi">गूगल</a> जो कि आपको गूगल के हिन्दी पृष्ठ पर ले जाएगी। इसी प्रकार, पाठकों के लगातार हिन्दी जालस्थल देखने का तारतम्य बना रहेगा। साथ ही, अधिक लोगों को पता चलेगा कि गूगल हिन्दी में भी है। इसी प्रकार बाङ्ग्ला, तेलुगु, मराठी, तमिल में भी गूगल की सीधी कड़ी बनाई जा सकती है। | 1:08 pm [alok]
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गूगल हिन्दी में - परिचय गूगल बहुत बड़ा है। आए दिन इसमें कुछ न कुछ होता रहता है। और इसमें से बहुत कुछ हिन्दी में भी है। तो यह सामुदायिक चिट्ठा आपको लगातार जानकारी देगा कि गूगल हिन्दी में क्या क्या गुल खिला रहा है। इससे हिन्दी के जाल प्रयोक्ताओं को नई सुविधाओं के बारे में तो पता चलेगा ही, साथ ही गूगल को भी अपने इन नए हिन्दी भाषी प्रयोक्ताओं की ज़रूरतों के बारे में एहसास होगा। यदि आप भी इस समुदाय के सदस्य बनना चाहते हों तो किसी भी प्रविष्टि की टिप्पणी में लिख दें, हम आपसे सम्पर्क करेंगे। आप अपने गूगल के साथ हुए छोटे से छोटे वाकये को भी यहाँ लिख सकते हैं - हमें विश्वास है कि इस समुदाय की प्रविष्टयों के पढ़ने वालों को गूगल के खाँसने, खखारने तक में दिलचस्पी है। ध्यान रहे, प्रविष्टियाँ हिन्दी में हों, नहीं तो हम उनका सर कलम कर देंगे। यहाँ लिखित सभी सामग्री ग्नू मुक्त प्रलेखन अनुमतिपत्र के अन्तर्गत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी। |
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